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रसवन्ती!
आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह जी दिनकर जी की एक अलग तरह की कविता शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी इस कविता में दर्शाते हैं कि कवि कोमल कान्त पदावली में अच्छी बातें लिखता रहता है, सोचता रहता है और मानव सभ्यता एक अलग ही रास्ते पर आगे बढ़ जाती है| लीजिए प्रस्तुत है दिनकर जी…