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गन्ने मेरे भाई!!
आज मैं बिना किसी भूमिका के स्वर्गीय बालकवि वैरागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, बाकी कविता अपनी बात स्वयं कहती है| बालकवि वैरागी जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|लीजिए प्रस्तुत है बालकवि वैरागी जी की यह कविता – इक्ष्वाकु वंश के आदि पुरुषगन्ने! मेरे भाई!!रेशे-रेशे में रसऔर रग-रग…
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यारों से दामन न छुड़ाओ इंशा-जी!
नहीं सिर्फ़ ‘क़तील’ की बात यहाँ कहीं ‘साहिर’ है कहीं ‘आली’ है, तुम अपने पुराने यारों से दामन न छुड़ाओ इंशा-जी| क़तील शिफ़ाई
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उनको न रुलाओ इंशा-जी!
क्या सोच के तुम ने सींची थी ये केसर क्यारी चाहत की, तुम जिनको हँसाने आए थे उनको न रुलाओ इंशा-जी| क़तील शिफ़ाई
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ये ज़ुल्म न ढाओ इंशा-जी!
जितने भी यहाँ के बासी हैं सब के सब तुमसे प्यार करें, क्या उनसे भी मुँह फेरोगे ये ज़ुल्म न ढाओ इंशा-जी| क़तील शिफ़ाई
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इसे छोड़ न जाओ इंशा-जी!
ये किसने कहा तुम कूच करो बातें न बनाओ इंशा-जी, ये शहर तुम्हारा अपना है इसे छोड़ न जाओ इंशा-जी|(Tribute to Ibne Insha) क़तील शिफ़ाई
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सत्य!
आज मैं बाबा नागार्जुन जी की आपातकाल में लिखी गई एक और कविता शेयर कर रहा हूँ| जनकवि बाबा नागार्जुन जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता – सत्य को लकवा मार गया हैवह लंबे काठ की तरहपड़ा रहता है सारा दिन, सारी…