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सब्र में भी हज़रत-ए-अय्यूब रहा हूँ!
फेंक आए थे मुझ को भी मिरे भाई कुएँ में, मैं सब्र में भी हज़रत-ए-अय्यूब रहा हूँ| मुनव्वर राना
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एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ!
दुनिया मुझे साहिल से खड़ी देख रही है, मैं एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ| मुनव्वर राना
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वो भी ज़माना था कि मैं ख़ूब रहा हूँ!
सच्चाई तो ये है कि तिरे क़र्या-ए-दिल में, इक वो भी ज़माना था कि मैं ख़ूब रहा हूँ| मुनव्वर राना
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इसी शहर का महबूब रहा हूँ!
अब कोई शनासा भी दिखाई नहीं देता, बरसों मैं इसी शहर का महबूब रहा हूँ| मुनव्वर राना
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रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ!
दुनिया तिरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ, तू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ| मुनव्वर राना
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बच्चे कभी सर्दी नहीं खाते!
अल्लाह ग़रीबों का मदद-गार है ‘राना’, हम लोगों के बच्चे कभी सर्दी नहीं खाते| मुनव्वर राना
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दवा भी नहीं खाते!
दावत तो बड़ी चीज़ है हम जैसे क़लंदर, हर एक के पैसों की दवा भी नहीं खाते| मुनव्वर राना
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कभी नींद की गोली नहीं खाते!
सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर, मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते| मुनव्वर राना
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न मिलेंगे ये क़सम भी नहीं खाते!
तुमसे नहीं मिलने का इरादा तो है लेकिन, तुम से न मिलेंगे ये क़सम भी नहीं खाते| मुनव्वर राना
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क्यूँ शौक़ से मिट्टी नहीं खाते!
हँसते हुए माँ-बाप की गाली नहीं खाते, बच्चे हैं तो क्यूँ शौक़ से मिट्टी नहीं खाते| मुनव्वर राना