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पंथ, दौलत से न जीता जाएगा!
आज स्वर्गीय मुकुट बिहारी ‘सरोज’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सरोज जी का भी कविता लिखने और प्रस्तुत करने का अनूठा अंदाज़ था, जिसके लिए वे बहुत सराहे जाते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी ‘सरोज’ जी का यह गीत – पंथ, दौलत से न जीता जाएगा नादान ! स्वर्ण-कलशों…
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दिल से उतर जाए तो अच्छा!
दुनिया की निगाहों में भला क्या है बुरा क्या, ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा| साहिर लुधियानवी
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तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा!
ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा, इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा| साहिर लुधियानवी
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अपना हाल तिरी बेबसी से हम!
गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से, पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम| साहिर लुधियानवी
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गिला न करेंगे किसी से हम!
लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद, लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम| साहिर लुधियानवी
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पेश आए हैं बेगानगी से हम!
मायूसी-ए-मआल-ए-मोहब्बत न पूछिए, अपनों से पेश आए हैं बेगानगी से हम| साहिर लुधियानवी
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कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम!
तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम, ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम| साहिर लुधियानवी
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कभी हालात पे रोना आया!
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया, बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी
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हम तो निर्जन के खंडहर हैं!
स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| एक समय था जब कवि सम्मेलनों में बलबीर सिंह ‘रंग’ जी की अलग ही पहचान हुआ करती थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का यह गीत – हम तो निर्जन के खंडहर हैं।जीवन का साथी सूनापन,उदासीनता का आराधन;प्रिय…