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पलकें बिछाए तो नहीं बैठीं!
आज श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| हिन्दी गीत और ग़ज़ल लेखन तथा पत्रिकाओं के संपादन में भी राही जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह प्यारा सा गीत – कटीले शूल भी दुलरा रहे हैं पाँव को मेरेकहीं तुम पंथ…