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बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन!
मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन, आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन| निदा फ़ाज़ली
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आदमी में होते हैं दस बीस आदमी!
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिस को भी देखना हो कई बार देखना| निदा फ़ाज़ली
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बस आब-ओ-दाना चल रहा है!
ज़ियादा क्या तवक़्क़ो हो ग़ज़ल से, मियाँ बस आब-ओ-दाना चल रहा है| राहत इन्दौरी