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तेरा मेला पीछे छूटा, राही चल अकेला!
आज एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ| फिल्म-संबंध, जो 1969 में रिलीज़ हुई थी, उसका एक गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह गीत श्रेष्ठ कवि प्रदीप जी ने लिखा है जो राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताएं लिखते थे, जैसे ‘आओ बच्चे तुम्हें दिखाएँ झांकी हिंदुस्तान की’ आदि-आदि| आज के इस गीत के लिए…
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फल ज़रूर आएँगे रोटी के पेड़ में!
कुछ फल ज़रूर आएँगे रोटी के पेड़ में, जिस दिन मिरा मुतालबा मंज़ूर हो गया| बशीर बद्र
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पास आ गया कि बहुत दूर हो गया!
सुब्ह-ए-विसाल पूछ रही है अजब सवाल, वो पास आ गया कि बहुत दूर हो गया| बशीर बद्र