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न कहकर वो मुकर जाए तो कहना!
बहुत ख़ुश हो कि उसने कुछ कहा है, न कहकर वो मुकर जाए तो कहना| जावेद अख़्तर
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समझ में जब ये आ जाए तो कहना!
ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल, समझ में जब ये आ जाए तो कहना| जावेद अख़्तर
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दुनिया तुमको रास आए तो कहना!
ये दुनिया तुमको रास आए तो कहना, न सर पत्थर से टकराए तो कहना| जावेद अख़्तर
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डैमोक्रैसी!
आज एक बार फिर मैं हास्य व्यंग्य के श्रेष्ठ कवि और बहुत अच्छे संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता, जो आज की लोकतान्त्रिक व्यवस्था का बहुत सुंदर…
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ए ज़िंदगी, थोड़ा तो दम ले ले!
ज़रूर एक नींद मेरे साथ ए मेहमान अ ग़म ले ले,सफ़र दरवेश है ए ज़िंदगी, थोड़ा तो दम ले ले| कैफ़ी आज़मी
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मिरे साथ जलते जलते!
शब-ए-इंतिज़ार आख़िर कभी होगी मुख़्तसर भी, ये चराग़ बुझ रहे हैं मिरे साथ जलते जलते| कैफ़ी आज़मी
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यूँही कोई मिल गया था!
यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते, वहीं थम के रह गई है मिरी रात ढलते ढलते| कैफ़ी आज़मी