Category: Uncategorized
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कोई हमारा न रहा!
कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी
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ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं!
ऐसे हंस हंस के न देखा करो सबकी जानिब, लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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यूँ तो मिला करती हैं सब से आँखें!
मिलने को यूँ तो मिला करती हैं सब से आँखें, दिल के आ जाने के अंदाज़ जुदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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मुझ से न पूछो मिरी नज़रें देखो!
हाल-ए-दिल मुझ से न पूछो मिरी नज़रें देखो, राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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ख़ुद अपनी दवा होते हैं!
हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वाले, दर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं!
यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं, मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी
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पहले दिन का सूरज- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं!
नर्म अल्फ़ाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे, पहली बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं| जावेद अख़्तर
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दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं!
छत की कड़ियों से उतरते हैं मिरे ख़्वाब मगर, मेरी दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं| जावेद अख़्तर
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कहें क्या कि किधर जाते हैं!
रास्ता रोके खड़ी है यही उलझन कब से, कोई पूछे तो कहें क्या कि किधर जाते हैं| जावेद अख़्तर