Category: Uncategorized
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कुछ ने कहा चेहरा तेरा!
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा, कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा | इब्न ए इंशा
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पवन सामने है नहीं गुनगुनाना!
आज हिन्दी नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मुझे विश्वास है कि वीरेंद्र मिश्र जी का यह सुंदर नवगीत आपको अवश्य प्रभावित करेगा| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का यह नवगीत– पवन सामने है नहीं गुनगुनानासुमन ने कहा पर भ्रमर ने न…
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फिर से बुला ले वो इशारा न रहा!
क्या बताऊँ मैं कहाँ यूँही चला जाता हूँ, जो मुझे फिर से बुला ले वो इशारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी
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मैं भी तुम्हारा न रहा!
ऐ नज़ारो न हँसो मिल न सकूँगा तुमसे, तुम मिरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी
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राह दिखा दे वही तारा न रहा!
शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे, जो मुझे राह दिखा दे वही तारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी