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नहीं मरता कोई जुदाई में!
ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में, ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे| क़तील शिफ़ाई
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मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे!
रहेगा साथ तिरा प्यार ज़िंदगी बनकर, ये और बात मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे| क़तील शिफ़ाई
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भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे!
वो दिल ही क्या तिरे मिलने की जो दुआ न करे, मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे| क़तील शिफ़ाई
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युगावतार गांधी!
भारतीय स्वाधीनता आंदोलन और गांधी जी के बारे में अनेक श्रेष्ठ कविताएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक प्रसिद्ध कविता मैं आज शेयर कर रहा हूँ, जो महात्मा गांधी जी के क्रांतिकारी नेतृत्व और प्रभाव का बखान करती है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की यह प्रसिद्ध कविता – चल पड़े…
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हर सदा पर बुलाती रही रात भर!
जो न आया उसे कोई ज़ंजीर-ए-दर, हर सदा पर बुलाती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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‘फ़ैज़’ ग़ज़ल इब्तिदा करो!
भीगी है रात ‘फ़ैज़’ ग़ज़ल इब्तिदा करो, वक़्त-ए-सरोद दर्द का हंगाम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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एक रोज़ करेगी नज़र वफ़ा!
आख़िर तो एक रोज़ करेगी नज़र वफ़ा, वो यार-ए-ख़ुश-ख़िसाल सर-ए-बाम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़