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अब ऐसी तसल्ली रहने दो!
क्या दर्द किसी का लेगा कोई इतना तो किसी में दर्द नहीं, बहते हुए आँसू और बहें अब ऐसी तसल्ली रहने दो| कैफ़ी आज़मी
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जो तुमने दिया वो सहने दो!
इक ख़्वाब ख़ुशी का देखा नहीं देखा जो कभी तो भूल गए, माँगा हुआ तुम कुछ दे न सके जो तुमने दिया वो सहने दो| कैफ़ी आज़मी
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अब बहते हैं आँसू बहने दो!
ये फूल चमन में कैसा खिला माली की नज़र में प्यार नहीं, हँसते हुए क्या क्या देख लिया अब बहते हैं आँसू बहने दो| कैफ़ी आज़मी
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जो कहते हैं उनको कहने दो!
या दिल की सुनो दुनिया वालो या मुझ को अभी चुप रहने दो, मैं ग़म को ख़ुशी कैसे कह दूँ जो कहते हैं उनको कहने दो| कैफ़ी आज़मी
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अकेले क्यों!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक और सुंदर कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी की कुछ कविताएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ और उनके बारे में अपनी जानकारी भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की…
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ठिकाने के दिन या ठिकाने की रातें!
‘फ़िराक़’ अपनी क़िस्मत में शायद नहीं थे, ठिकाने के दिन या ठिकाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
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ग़म भूल जाने की रातें!
हम-आग़ोशियाँ शाहिद-ए-मेहरबाँ की, ज़माने के ग़म भूल जाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
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याद है तेरी हर सुब्ह-ए-रुख़्सत!
मुझे याद है तेरी हर सुब्ह-ए-रुख़्सत, मुझे याद हैं तेरे आने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
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फुवारें सी नग़्मों की पड़ती हों जैसे!
फुवारें सी नग़्मों की पड़ती हों जैसे, कुछ उस लब के सुनने-सुनाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी