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राजे ने अपनी रखवाली की!
आज एक बार फिर मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निराला जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह कविता- राजे ने अपनी रखवाली की;किला बनाकर रहा;बड़ी-बड़ी फ़ौजें रखीं…
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आँखों में रात रह जाए!
मैं सो रहा हूँ तिरे ख़्वाब देखने के लिए,ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए| शकील आज़मी
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बिछड़ भी जाएँ तो!
कुछ इस तरह से मिलें हम कि बात रह जाए,बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हात रह जाए| शकील आज़मी
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मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी की लिखी प्रसिद्ध ‘राष्ट्र-वंदना’ प्रस्तुत कर रहा हूँ – मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीरसौ-सौ नमन करूं मैं भैया सौ सौ नमन करूं! आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ********