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लेकिन तिरी समझ में!
हर शे’र में सुना तो गया हूँ मैं हाल-ए-दिल,लेकिन तिरी समझ में न आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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हम छोड़ चले हैं महफिल को !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का ये गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे उन्होंने फिल्म-‘ दिल चाह्ता है’ के लिए गाया था- हम छोड़ चले हैं महफिल को, याद आएं कभी तो मत रोना! आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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कवि के मन की मौज!
आज प्रस्तुत है एक नवगीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कविता में किस किसकी शामतअब तक तुमने नहीं बुलाई,रात को बना डाला दुल्हिन झटपट से शादी रचवाई, पता नहीं चलता कब किसकोकिस हालत में तुम रख दोगे। लिखा धूप पर, सूरज पर,आवारा बादल पर लिख डाला, मौसम की मदमस्त अदाओं कोकविता के बीच संभाला, सब्र…
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माना सुकूँ-नवाज़ है!
माना सुकूँ-नवाज़ है हर शय बहार में, तेरे बग़ैर चैन न आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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मुझ को तुम्हारी याद!
ये तो बताते जाओ अगर जा रहे हो तुम! मुझ को तुम्हारी याद सताए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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हर शय में तू ही तू!
हर शय तुझी को सामने लाए तो क्या करूँ,हर शय में तू ही तू नज़र आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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हम भी हाथ फैलाएँ!
वहीं चलो वहीं अब हम भी हाथ फैलाएँ,‘शमीम’ सारे जहाँ को जहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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अगर तलब हो तो!
तलब न हो तो किसी दर से कुछ नहीं मिलता, अगर तलब हो तो दोनों जहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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हाल ए दिल हमारा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उन्होंने फिल्म- श्रीमान सत्यवादी के लिए गाया था- हाल ए दिल हमारा, जाने ना बेवफा ये ज़मानासुनो दुनिया वालों, आएगा लौटकर दिन सुहाना आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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ये देखना है सुकूँ!
दर-ए-हबीब भी है बुत-कदा भी काबा भी,ये देखना है सुकूँ अब कहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी