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रात के आख़िर होते!
अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ’ भी थी परवाना भी,रात के आख़िर होते होते ख़त्म था ये अफ़्साना भी| आरज़ू लखनवी
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निर्मल मन लेकर आए!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- निर्मल मन लेकर आए होसोच रहे हो खुश रह लोगे! इस जग का व्यवहार अलग हैयहाँ नहीं मन किसी काम का,दाम यहाँ केवल चलता हैकुछ न मोल है यहाँ साम का, झूठों का अंबार कचहरी देखेगीतुम क्या कह लोगे। रात वेदना की जब छाए,बांध…
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जब बंद हुईं आँखें तो!
जब बंद हुईं आँखें तो खुला दो रोज़ का था सारा झगड़ा, तख़्त उस का न अब है ताज उस का अस्कंदर ओ दारा कोई नहीं| आरज़ू लखनवी
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उस आँख से पर्दा!
गुल-गश्त में दामन मुँह पे न लो नर्गिस से हया क्या है तुम को,उस आँख से पर्दा करते हो जिस आँख में पर्दा कोई नहीं| आरज़ू लखनवी
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आराम के थे साथी!
आराम के थे साथी क्या क्या जब वक़्त पड़ा तो कोई नहीं,सब दोस्त हैं अपने मतलब के दुनिया में किसी का कोई नहीं| आरज़ू लखनवी
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झूमती चली हवा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज एक बार फिर अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- झूमती चली हवा, याद आ गया कोई, आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद।
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तांडव!
आज एक बार फिर मैं राष्ट्रकवि के रूप में विख्यात स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। दिनकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता- नाचो, हे नाचो, नटवर !चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर !…
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उस शर्मगीं नज़र का!
उस शर्मगीं नज़र का तसव्वुर अगर ‘शमीम’,बिजली दिल-ओ-नज़र पे गिराए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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उन की वफ़ा भी!
दिल हो गया है ख़ूगर-ए-बेदाद ‘इश्क़ में,उन की वफ़ा भी रास न आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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जलाए तो क्या करूँ!
अब ‘इश्क़ से ज़ियादा ग़म-ए-तर्क-ए-इश्क़ है,ये आग बुझ के और जलाए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी