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मैं पल दो पल का शायर हूँ!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- कभी कभी के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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किसी को देखते ही!
किसी को देखते ही आप को आभास होता है,निगाहें आ गईं परछाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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गृहस्थ!
आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – प्राण-प्रतिष्ठा कर दी मैंनेसारे देवों के विग्रह मेंफिर भी मूक-बधिर-अन्धे बनवे सब मन्दिर में…
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नदी के हाथ निर्झर!
नदी के हाथ निर्झर को मिली पाती समुंदर को, सतह भी आ गई गहराइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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धरा पर थम गई आँधी!
धरा पर थम गई आँधी गगन में काँपती बिजली,घटाएँ आ गईं अमराइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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ज़माना आ गया!
ज़माना आ गया रुस्वाइयों तक तुम नहीं आए,जवानी आ गई तन्हाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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यही पयाम मिला!
ये रंग-ओ-नूर का ‘गुलज़ार’ दहर-ए-फ़ानी है,यही पयाम मिला उम्र-ए-मुख़्तसर से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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गिरा सका न ज़माना!
ज़माना मेरी नज़र से तो गिर गया लेकिन,गिरा सका न ज़माना तिरी नज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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ज़माना देख रहा है!
ज़रा तो सोच हिक़ारत से देखने वाले,ज़माना देख रहा है तिरी नज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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न राहज़न से ग़रज़!
किसी की राह-ए-मोहब्बत में बढ़ता जाता हूँ,न राहज़न से ग़रज़ है न राहबर से मुझे| गुलज़ार देहलवी