Category: Uncategorized
-
झूठ क्या, बहाना क्या !
आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि श्री इसाक अश्क जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इसाक जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री इसाक अश्क जी का यह नवगीत – हम जैसे लोगों काठौर क्या ?ठिकाना क्या ? भूख प्यासपीड़ाओं नेझिड़की दे-देकर पालाहमसे है…
-
बे-वक़्त की घुटन!
ले आई छत पे क्यूँ मुझे बे-वक़्त की घुटन,तेरी तो ख़ैर बाम पे आने की उम्र है| अज़हर फ़राग़
-
चाँद की लाश कहीं!
सुब्ह-दम सुर्ख़ उजाला है खुले पानी में,चाँद की लाश कहीं से भी उभर सकती है| अज़हर फ़राग़
-
हो अगर मौज में!
हो अगर मौज में हम जैसा कोई अंधा फ़क़ीर,एक सिक्के से भी तक़दीर सँवर सकती है| अज़हर फ़राग़
-
मेरी ख़्वाहिश है कि!
मेरी ख़्वाहिश है कि फूलों से तुझे फ़त्ह करूँ,वर्ना ये काम तो तलवार भी कर सकती है| अज़हर फ़राग़
-
ये मोहब्बत तो!
तुझ से कुछ और त’अल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा,ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है| अज़हर फ़राग़
-
गोरे तन से चमके बिजुरिया!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- मेरा नाम जोकर के एक युगल गीत में मुकेश जी द्वारा गाया गया अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ- गोरे तन से चमके बिजुरिया,आग न लग जाए। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
-
चाँदनी की पाँच परतें!
आज एक बार फिर मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी का यह नवगीत – चाँदनी की पाँच परतें,हर परत अज्ञात है । एक जल…
-
सुख़न की शाख़ पे!
ज़मीन बाँझ न हो जाए कुछ कहो ‘अज़हर’,सुख़न की शाख़ पे कब से समर नहीं आया| अज़हर इक़बाल