Category: Uncategorized
-
फूल सब ले जाएँगे!
हम कहीं भी हों मगर ये छुट्टियाँ रह जाएँगी,फूल सब ले जाएँगे पर पत्तियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे
-
आप बचाते रहना!
तुम भी ‘मुनीर’ अब उन गलियों से अपने आप को दूर ही रखना,अच्छा है झूटे लोगों से अपना-आप बचाते रहना| मुनीर नियाज़ी
-
ख़ुश्बू की दीवार के !
ख़ुश्बू की दीवार के पीछे कैसे कैसे रंग जमे हैं,जब तक दिन का सूरज आए उस का खोज लगाते रहना| मुनीर नियाज़ी
-
नक़्श मिटाते रहना!
रात के दश्त में फूल खिले हैं भूली-बिसरी यादों के,ग़म की तेज़ शराब से उन के तीखे नक़्श मिटाते रहना| मुनीर नियाज़ी
-
घर भी जाते रहना!
अपने घरों से दूर बनों में फिरते हुए आवारा लोगो,कभी कभी जब वक़्त मिले तो अपने घर भी जाते रहना| मुनीर नियाज़ी
-
सजन रे झूठ मत बोलो
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया एक और गीत, फिल्म- तीसरी कसम से, अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****
-
सातों दिन भगवान के!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज फिर से मैं निदा फाज़ली साहब के लिखे कुछ दोहे अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनको जगजीत सिंह जी ने गाया था- सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या वीर! आशा है आपको ये पसंद आएंगे, धन्यवाद। *****
-
अपना तो ये काम है!
अपना तो ये काम है भाई दिल का ख़ून बहाते रहना,जाग जाग कर इन रातों में शे’र की आग जलाते रहना| मुनीर नियाज़ी
-
बेटियाँ!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि तथा मेरे लिए गुरु तुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह गीत – बेटियाँ-शीतल हवाएँ हैंजो पिता के घर बहुत दिन तक…