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राजा के पोखर में!
आज मैं हिंदी के वरिष्ठ कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – ऊपर ऊपर लाल मछलियाँनीचे ग्राह बसे।राजा के पोखर में हैपानी की थाह किसे। जलकर राख…
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टूटता रहता हूँ!
मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी