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आपस में लड़ोगे तुम!
रिंदों को ‘हफ़ीज़’ इतना समझा दे कोई जा कर,आपस में लड़ोगे तुम वाइ’ज़ का भला होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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दीवाने से दीवाना!
फ़र्ज़ानों का क्या कहना हर बात पे लड़ते हैं,दीवाने से दीवाना शायद ही लड़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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दीवाना लिपट जाए!
कतरा के तो जाते हो दीवाने के रस्ते से,दीवाना लिपट जाए क़दमों से तो क्या होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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चुप रहिए तो बर्बादी!
क्या तेरा मुदावा हो दर्द-ए-शब-ए-तन्हाई,चुप रहिए तो बर्बादी कहिए तो गिला होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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क्या वह नहीं होगा!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि तथा स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता – क्या फिर वही होगाजिसका हमें डर है ?क्या वह नहीं होगाजिसकी हमें आशा…
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कुछ सोच के परवाना!
कुछ सोच के परवाना महफ़िल में जला होगा,शायद इसी मरने में जीने का मज़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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अपने गुलिस्ताँ को!
सहरा से बहारों को ले आए चमन वाले,और अपने गुलिस्ताँ को आबाद नहीं करते| फ़ना निज़ामी कानपुरी
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फ़रियाद नहीं करते!
कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास-ए-मोहब्बत है,हम आह तो करते हैं फ़रियाद नहीं करते| फ़ना निज़ामी कानपुरी