Category: Uncategorized
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पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, मन्ना डे जी का गाया प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लिखा था शैलेंद्र जी ने और इसका संगीत दिया थ सचिन देव बर्मन जी ने- पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई, एक पल जैसे एक युग बीतायुग बीते मोहे नींद न आई।…
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तमाशा देखने को!
खड़े हैं राह चलते लोग कितनी ख़ामुशी से,सड़क पर मरने वालों का तमाशा देखने को। मंज़र भोपाली
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हवाए संदली हैं!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री सोम ठाकुर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– हवाए संदली हैंहम बचें कैसे?समय के विष बुझेनाख़ून बढ़ते हैं देखती आँखें छलक कररक्त का…
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गए थे शौक़ से हम भी!
गए थे शौक़ से हम भी ये दुनिया देखने को,मिला हम को हमारा ही तमाशा देखने को। मंज़र भोपाली
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मिरे दिल की चीख़ें!
अरे सुनने वालो ये नग़्मे नहीं हैं,मिरे दिल की चीख़ें हैं शहनाइयों में| कैफ़ भोपाली
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अच्छा है पर कभी कभी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में हुल्लड मुरादाबादी जी की एक हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- बहरों को फरियाद सुनाना अच्छा है पर कभी कभी! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *******
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ज़रा मिल तो जाएँ वो!
मोहब्बत है या आज तर्क-ए-मोहब्बत, ज़रा मिल तो जाएँ वो तन्हाइयों में| कैफ़ भोपाली
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ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में आनंद फिल्म का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे योगेश जी ने लिखा था और सलिल चौधरी जी के संगीत निर्देशन में मन्ना डे जी ने गाया था- ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय, कभी तो हंसाए कभी ये रुलाए! आशा है आपको यह पसंद…