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चिड़िया की उड़ान!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ व्यंग्य कवि एवं मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। चक्रधर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – चिड़िया तू जो मगन, धरा मगन, गगन मगन,फैला ले पंख ज़रा,…
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गर ज़बाँ मिट जाएगी!
‘मंज़र’ अपने ख़ून से इस शाख़ को सरसब्ज़ कर,गर ज़बाँ मिट जाएगी तेरा हुनर देखेगा कौन| मंज़र भोपाली