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प्रेम, भय और अतीत!
मैक्सिम गोर्की के उपन्यास ‘मां’ में एक वृद्ध महिला जो विद्रोह का नेतृत्व करती है और उसे ‘मां’ कहा गया है, वह बोलती है – ‘जो हमारी आज हालत है, इससे बुरा क्या हो सकता है!’ इसलिए डर किस बात का है, खुलकर सामने आओ और अत्याचारी शासन के विरुद्ध विद्रोह करो! जब तक शासन…
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लोगों ने साथ निभाया!
इतने दिन एहसान किया दीवानों पर,जितने दिन लोगों ने साथ निभाया है| साहिर लुधियानवी
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दिल ही काम आया है!
अव्वल अव्वल जिस दिल ने बर्बाद किया,आख़िर आख़िर वो दिल ही काम आया है| साहिर लुधियानवी
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पैदाइश के दिन से!
पैदाइश के दिन से मौत की ज़द में हैं,इस मक़्तल में कौन हमें ले आया है| साहिर लुधियानवी
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इंसाँ का ख़ूँ बहाया है!
झूट तो क़ातिल ठहरा इस का क्या रोना,सच ने भी इंसाँ का ख़ूँ बहाया है| साहिर लुधियानवी
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ख़ुशियों का लोभ!
हम को इन सस्ती ख़ुशियों का लोभ न दो,हम ने सोच समझ कर ग़म अपनाया है| साहिर लुधियानवी
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ग़रज़-परस्त जहाँ में !
ग़रज़-परस्त जहाँ में वफ़ा तलाश न कर,ये शय बनी थी किसी दूसरे जहाँ के लिए| साहिर लुधियानवी