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शेरों में जो ख़ूबी है!
कहते हैं मिरे हक़ में सुख़न-फ़हम बस इतना,शेरों में जो ख़ूबी है मुआ’नी* से नहीं है|*SecondMeaning शहरयार
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दोहराता नहीं मैं भी!
दोहराता नहीं मैं भी गए लोगों की बातें,इस दौर को निस्बत भी कहानी से नहीं है| शहरयार
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फ़ुर्सत जिन्हें अब!
कल यूँ था कि ये क़ैद-ए-ज़मानी से थे बेज़ार,फ़ुर्सत जिन्हें अब सैर-ए-मकानी से नहीं है| शहरयार
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रिश्ता मिरी प्यास का!
शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं है,रिश्ता ही मिरी प्यास का पानी से नहीं है| शहरयार