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आज किस ने सुख़न!
ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया,फिर आज किस ने सुख़न हम से ग़ाएबाना* किया| *Unseen फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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दो हाथ!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ नवगीत कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। ओम प्रभाकर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – ये फैलेखुलेदो हाथये करें तो क्या करें? छिली-कुचली-कसमसाती अँजुरियों मेंधुआँ-कोहरा-रेत ये कैसे भरें!…
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ख़ास सड़कें बंद हैं!
ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए, ये हमारे वक़्त की सब से सही पहचान है| दुष्यंत कुमार
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एक गुड़िया की कई!
एक गुड़िया की कई कठ-पुतलियों में जान है, आज शाइ‘र ये तमाशा देख कर हैरान है| दुष्यंत कुमार
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कुछ देखना नहीं है!
दुनिया का हर नज़ारा निगाहों से छीन ले,कुछ देखना नहीं है तुझे देख कर मुझे| क़मर जलालाबादी