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शायरी है सरमाया!
शायरी है सरमाया ख़ुश-नसीब लोगों का,बाँस की हर इक टहनी बाँसुरी नहीं होती| हस्तीमल हस्ती
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भीक के उजालों से!
ख़ुद चराग़ बन के जल वक़्त के अँधेरे में,भीक के उजालों से रौशनी नहीं होती| हस्तीमल हस्ती
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दोस्ती नहीं होती!
दोस्त पे करम करना और हिसाब भी रखना,कारोबार होता है दोस्ती नहीं होती| हस्तीमल हस्ती
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दिल में जो मोहब्बत!
दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती,इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती| हस्तीमल हस्ती
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क़ाफ़िला ख़्वाबों का!
गर्द-ए-राह की सूरत साँस साँस है ऐ ‘नूर’,मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ क़ाफ़िला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
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सच ही सच लगे सब!
नश्शे का ये आलम है सच ही सच लगे सब कुछ,ज़िंदगी की सहबा है मय-कदा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
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तज़्किरा है ख़्वाबों का!
अपनी अपनी ताबीरें ढूँढता है हर चेहरा,चेहरा चेहरा पढ़ लीजे तज़्किरा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
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अपना कौन, पराया कौन!
आज एक ग़ज़ल सादर अवलोकनार्थ ग़ज़ल अपना कौन, पराया कौन,यह परिभाषा लाया कौन। रिश्तों की तुरपाई में, अपना स्वत्व गंवाया कौन। सुविधाओं की नदिया में,डूबा कौन, नहाया कौन। इस जुलूस में लोगों के,है अपना हमसाया कौन। विषय नहीं कुछ तर्क नहीं फिर ये बहस बढ़ाया कौन। सत्ता के मदिरालय में,पीकर खूब अघाया कौन। अब तो…
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अनुपस्थिति!
आज मैं हिंदी की श्रेष्ठ कवियित्री स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। यह कविता अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में शामिल थी। कीर्ति जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की यह कविता – सुबह हुई तो, सूरज…
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हौसला है ख़्वाबों का!
देखें इस कशाकश का इख़्तिताम हो कब तक, जागने की ख़्वाहिश है हौसला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर