Category: Uncategorized
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आशिक़ थे शहर में!
आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब केहैं उन के दिल में वसवसे अब एहतिसाब* के *Thinking About Results आदिल मंसूरी
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ये क्या सितम है कि!
ये क्या सितम है कि इस नश्शा-ए-मोहब्बत में,तिरे सिवा भी किसी को पुकार आए हम| अज़हर इक़बाल
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तिरे बग़ैर जो उम्रें!
तिरे ही लम्स से उन का ख़िराज मुमकिन है, तिरे बग़ैर जो उम्रें गुज़ार आए हम| अज़हर इक़बाल
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गुलाब चाँदनी-रातों पे!
गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम,तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम| अज़हर इक़बाल
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वैसे दिल में क्या क्या!
तुम जो गए तो भूल गए सारी बातें,वैसे दिल में क्या क्या चलता रहता है| अज़हर इक़बाल