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सांपिन
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री नंद किशोर आचार्य जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। आचार्य जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नंद किशोर आचार्य जी की यह कविता – साँपिन अंडे देती हैऔर कुँडली में घेर लेती उन्हेंऔर खाती रहती हैअपने ही…
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मैंने कैसे कैसे सदमे!
मैं ने कैसे कैसे सदमे झेल लिए हैं,इस का मतलब ज़हर पचाया जा सकता है| शकील जमाली