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ज़माने से कहो कुछ!
ज़माने से कहो कुछ साइक़ा-रफ़्तार हो जाए,हमारे साथ चलने के लिए तय्यार हो जाए| कैफ़ भोपाली
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सियाही ख़ून बन जाए!
सलाम उस पर अगर ऐसा कोई फ़नकार हो जाए,सियाही ख़ून बन जाए क़लम तलवार हो जाए| कैफ़ भोपाली
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उसने मेरे बेगानेपन!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ नवगीतकार श्री नचिकेता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। नचिकेता जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत – उसने मेरेबेगानेपन को हीछेड़ दियाघनी उमस मेंकभी न उसनेपंखा हाँका हैलसिया गए भात कोदेसी घी से छौंका…