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आँख मूँद के पी जाओ!
तुम आँख मूँद के पी जाओ ज़िंदगी ‘क़ैसर’,कि एक घूँट में मुमकिन है बद-मज़ा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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आगरे का धोबी- हास्य कविता!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी की यह हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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कोई बेवफ़ा न लगे!
तू इस तरह से मिरे साथ बेवफ़ाई कर,कि तेरे बा’द मुझे कोई बेवफ़ा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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सपनों का सौदागर आया!
अपने यूट्यू चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में राज कपूर जी द्वारा अभिनीत फिल्म – ‘सपनों का सौदागर’ में उनके लिए मुकेश जी का गाया प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- सपनों का सौदागर आया, ले लो ये सपने ले लो! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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किसी की उदास आँखों में!
न जाने क्या है किसी की उदास आँखों में,वो मुँह छुपा के भी जाए तो बेवफ़ा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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जगत के कुचले हुए पथ पर!
आज मैं विख्यात व्यंग्यकार स्वर्गीय हरिशंकर परसाई जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। परसाई जी ने शायद अधिक कविताएं नहीं लिखी हैं और उनकी कोई रचना मैंने पहले शेयर नहीं की है।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिशंकर परसाई जी की यह कविता– किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझकोनहीं है पद चिह्न…
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बाज़ार की हवा न लगे!
वो फूल जो मिरे दामन से हो गए मंसूब,ख़ुदा करे उन्हें बाज़ार की हवा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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इतने सुकून से डूबो!
जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो,कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री