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ये एक पल है उसे!
अदम हयात से पहले अदम हयात के बा’द,ये एक पल है उसे जावेदाँ बनाता जा| अली सरदार जाफ़री
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आ गया है जहाँ में!
अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा,चमन के फूल दिलों के कँवल खिलाता जा| अली सरदार जाफ़री
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मैं ये उमीद लिए!
कभी तो मेरी भी सुनवाई होगी महफ़िल में,मैं ये उमीद लिए बार बार जाता रहा| जावेद अख़्तर
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केवल दो गीत लिखे!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। राजन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत– केवल दो गीत लिखे मैंनेइक गीत तुम्हारे मिलने काइक गीत तुम्हारे खोने का। सड़कों-सड़कों, शहरों-शहरोंनदियों-नदियों, लहरों-लहरोंविश्वास…
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सीने में इक आग थी!
कभी जो सीने में इक आग थी वो सर्द हुई, कभी निगाह में जो था शरार जाता रहा| जावेद अख़्तर
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ख़ुमार जाता रहा!
किसी की आँख में मस्ती तो आज भी है वही, मगर कभी जो हमें था ख़ुमार जाता रहा| जावेद अख़्तर
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ख़ुलूस तो है मगर!
खुला है दर प तिरा इंतिज़ार जाता रहा,ख़ुलूस तो है मगर ए’तिबार जाता रहा| जावेद अख़्तर
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अगर हो रात लिखूँ!
जाने ये कैसा दौर है जिस में जुरअत भी तो मुश्किल है,दिन हो अगर तो उस को लिखूँ दिन रात अगर हो रात लिखूँ| जावेद अख़्तर
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फ़िरक़े ज़ात लिखूँ!
अपनी अपनी तारीकी को लोग उजाला कहते हैं,तारीकी के नाम लिखूँ तो क़ौमें फ़िरक़े ज़ात लिखूँ| जावेद अख़्तर