Category: Uncategorized
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बुझे बुझे से कुछ!
चराग़-ए-क़ुर्ब* से कर दीजिए उन्हें रौशन,बुझे बुझे से कुछ अरमान ले के आए हैं|*Nearness मंज़र भोपाली
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मैं सब दिन पाषाण नहीं था!
आज मैं हिंदी के विख्यात कवि स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नरेंद्र शर्मा जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का यह गीत– मैं सब दिन पाषाण नहीं था किसी शापवश हो निर्वासित,लीन हुई चेतनता मेरी;मन-मन्दिर का दीप…
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तमाम ‘उम्र गुज़ारी!
तमाम ‘उम्र गुज़ारी ख़याल में जिस के,तमाम ‘उम्र उसी की तरफ़ नहीं देखा| मंज़र भोपाली
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मिरी अना ने किसी!
कचोके देती रहीं ग़ुर्बतें मुझे लेकिन,मिरी अना ने किसी की तरफ़ नहीं देखा| मंज़र भोपाली