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पलकों की ओट में!
पलकों की ओट में वो छुपा ले गया मुझे,या’नी नज़र नज़र से बचा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर
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ये क़िस्सा क्या है!
वो जो क़िस्से में था शामिल वही कहता है मुझे,मुझ को मालूम नहीं यार ये क़िस्सा क्या है| हस्तीमल हस्ती
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उन से बन जाते हैं!
बैठते जब हैं खिलौने वो बनाने के लिए,उन से बन जाते हैं हथियार ये क़िस्सा क्या है| हस्तीमल हस्ती
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सामने कोई भँवर है!
सामने कोई भँवर है न तलातुम फिर भी,छूटती जाए है पतवार ये क़िस्सा क्या है| हस्तीमल हस्ती
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सिर्फ़ नफ़रत ही थी!
सिर्फ़ नफ़रत ही थी मेरे लिए जिन के दिल में,हो गए वो भी तरफ़-दार ये क़िस्सा क्या है| हस्तीमल हस्ती
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घर तक की यात्रा – रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…
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तुम भी ख़ामोश हो!
वो भी चुप-चाप है इस बार ये क़िस्सा क्या है,तुम भी ख़ामोश हो सरकार ये क़िस्सा क्या है| हस्तीमल हस्ती
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जाल!
आज मैं हिंदी की श्रेष्ठ कवियित्री सुश्री पद्मा सचदेव जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री पद्मा सचदेव जी की यह कविता– सुनोसुनो तो सहीमेरे आसपास बँधा हुआ ये जाल मत तोड़ोमैंने सारी उम्र इसमें से निकलने का यत्न किया हैइससे…
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राह-ए-वफ़ा में फूल!
राह-ए-वफ़ा में फूल नहीं हैं ख़ार बहुत हैं ‘हस्ती’ जी,प्यार का दुश्मन सारा ज़माना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती
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पंछी की परवाजों में!
जिस पंछी की परवाजों में जोश-ए-जुनूँ भी शामिल हो,उस की ख़ातिर आब-ओ-दाना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती