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जागना अपराध!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय माखन लाल चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखन लाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – जागना अपराध!इस विजन-वन गोद में सखि,मुक्ति-बन्धन-मोद में सखि,विष-प्रहार-प्रमोद में सखि, मृदुल भावोंस्नेह दावोंअश्रु के अगणित…
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अँगूठे-सा दंग हूँ!
ये किसका दस्तख़त है, बताए कोई मुझे,मैं अपना नाम लिख के अँगूठे-सा दंग हूँ। सूर्यभानु गुप्त