Category: Uncategorized
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जी तो कहता है कि!
जी तो कहता है कि बिस्तर से न उतरूँ कई रोज़,घर में सामान तो हो बैठ के खाने के लिए| शकील जमाली
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दूकान चलाने के लिए!
नफ़रतें बेचने वालों की भी मजबूरी है, माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए| शकील जमाली
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मैं उसे ढूँढ रहा हूँ!
हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद,मैं उसे ढूँढ रहा हूँ ये बताने के लिए| शकील जमाली
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आदमी धुएं के हैं!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की है। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की यह कविता – ताँबे का आसमान,टिन के सितारे,गैसीला अन्धकार,उड़ते हैं कसकुट के पंछी बेचारे,लोहे की धरती परचाँदी की…
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अश्क पीने के लिए!
अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए,अब मिरे पास ख़ज़ाना है लुटाने के लिए| शकील जमाली
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सूनापन चहका-चहका!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री यश मालवीय जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। यश जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की है। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री यश मालवीय जी का यह गीत – अभिवादन बादल-बादलख़बर लिये वन-उपवन कीकितने आशीर्वाद लियेपहली बरखा सावन की बरस-बरस हैं घन बरसेअब की…