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शीशा टूट जाता है!
किसी से इश्क़ करते हो तो फिर ख़ामोश रहिएगा, ज़रा सी ठेस से वर्ना ये शीशा टूट जाता है| हसीब सोज़
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मगर वो क्या करे!
तसल्ली देने वाले तो तसल्ली देते रहते हैं,मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है| हसीब सोज़
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बाहर के मधुबन से!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राम्स्वरूप सिंदूर जी का यह गीत – आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत शेयर कर रहा…
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न इतना शोर कर!
न इतना शोर कर ज़ालिम हमारे टूट जाने पर,कि गर्दिश में फ़लक से भी सितारा टूट जाता है| हसीब सोज़
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कई झूटे इकट्ठे हों!
यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है,कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है| हसीब सोज़
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ये शोर बनेगा किसी!
ये शोर बनेगा किसी बेकस का तराना, दुनिया मिरी ज़ंजीर से हैरान अभी है। क़मर अब्बास क़मर
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इस शहर में कुछ!
इस शहर में कुछ लोगों से पहचान अभी है,या’नी कि मिरे होने का इम्कान अभी है। क़मर अब्बास क़मर