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वैसे हम घबराए तो!
देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो, आस ने दिल का साथ न छोड़ा वैसे हम घबराए तो| अंदलीब शादानी
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गीतों का बादल!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। अवस्थी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर नहीं हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत – मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।प्यासे नयनों में हँसता काजल हूँ ।…
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लकड़ियाँ सुलगने में!
मुस्तक़िल नहीं ‘अमजद’ ये धुआँ मुक़द्दर का,लकड़ियाँ सुलगने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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हुस्न के सँवरने में!
हो चमन के फूलों का या किसी परी-वश का, हुस्न के सँवरने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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भीड़ वक़्त लेती है!
भीड़ वक़्त लेती है रहनुमा परखने में, कारवान बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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तितलियाँ पकड़ने में!
उन की और फूलों की एक सी रिदाएँ हैं, तितलियाँ पकड़ने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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रंग यूँ तो होते हैं!
रंग यूँ तो होते हैं बादलों के अंदर ही, पर धनक के बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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ख़्वाहिशें परिंदों से!
ख़्वाहिशें परिंदों से लाख मिलती-जुलती हों, दोस्त पर निकलने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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सीढ़ियाँ उतरने में!
दस्तकें भी देने पर दर अगर न खुलता हो, सीढ़ियाँ उतरने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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दर्द की कहानी को!
दर्द की कहानी को इश्क़ के फ़साने को, दास्तान बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद