Category: Uncategorized
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दुनिया तो अफ़्वाह!
खोज रहा है आज भी वो गूलर का फूल,दुनिया तो अफ़्वाह उड़ा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर
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संगीत के लिए कुछ छंद
आज एक बार फिर से पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ। आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। (अनुवाद हेतु मूल रचनाएं मैं सामान्यतः ‘Poemhunter.com’ से लेता हूँ।) पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- संगीत के लिए…
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थी हर एक बात में!
थी हर एक बात में चाशनी हक़-ओ-सिद्क़-ओ-लुत्फ़-ओ-ख़ुलूस की,रह-ए-हक़ पे चलना शिआ’र था तुम्हें याद हो कि न याद हो| अर्श मलसियानी
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ये चली है कैसी हवा!
ये चली है कैसी हवा कि अब नहीं खिलते फूल मिलाप के,कभी दौर-ए-फ़स्ल-ए-बहार था तुम्हें याद हो कि न याद हो| अर्श मलसियानी