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कोई रक्तपलाश!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीय शांति सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शांति सुमन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है शांति सुमन जी की यह कविता – अबके इस होली में कोई रक्तपलाश खिलेअनुबन्धों की याद दिलाए, पीत कनेर हिले घाट नहाती लड़की…
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ख़ुशबू-ए-आवारा!
हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैंऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है बशीर बद्र
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जिसमें तिरे गेसू की!
वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी हैजिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है बशीर बद्र
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ना-गुफ़्ता कहानी है!
वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा* हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता** कहानी है|*Unseen, **Untold बशीर बद्र
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यादों की कहानी है!
दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है,शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है| बशीर बद्र
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क्या जान गँवानी है!
इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र