Category: Uncategorized
-
सच मुझे लिखना है!
ता-कि महफ़ूज़ रहे मेरे क़लम की हुरमत,सच मुझे लिखना है मैं हुस्न को सच लिक्खूंगा। शहरयार
-
दूसरा दर्जा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री हेमंत शेष जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| हेमंत जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री हेमंत शेष जी की यह कविता – दोपहर का वक़्त था वहपर ठीक दोपहर जैसा नहीं,नदी जैसी कोई चीज़ भागती हुई खिड़की से बाहरसूख…