Category: Uncategorized
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वो मिरा घर है!
किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं ‘अमीर’,वो मिरा घर है रहे जिस में मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई
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तेरी तस्वीर में!
हुस्न और इश्क़ हम-आग़ोश नज़र आ जाते,तेरी तस्वीर में खिंच जाती जो हैरत मेरी| अमीर मीनाई
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यार पहलू में है!
यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले,आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी| अमीर मीनाई
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बेदर्द नज़ाकत मेरी!
मैं ने आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी खेंचा तो कहा,पिस गई पिस गई बेदर्द नज़ाकत मेरी| अमीर मीनाई
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प्रवचन!
एक बार फिर से आज मैं वरिष्ठ हिंदी कवि श्री रामदरश मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता– टी.वी. खोलते हीचैनलों पर बाबाओं के जलवे दिखाई पड़ने लगते हैंतरह-तरह के संत-वेश धारण किये…
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हँस के फ़रमाते हैं!
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी, क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई
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बर्क़-जमाल अच्छा है!
बर्क़ अगर गर्मी-ए-रफ़्तार में अच्छी है ‘अमीर’,गर्मी-ए-हुस्न में वो बर्क़-जमाल अच्छा है| अमीर मीनाई