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फुटपाथ की हालत!
सुर्ख़ी में छपी है, पढ़ो मीनार की लागत,फुटपाथ की हालत से सरोकार नहीं है। शेरजंग गर्ग
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दर्द का दरबार है!
जेबों में नहीं, सिर्फ़ गरेबान में झाँको,यह दर्द का दरबार है बाज़ार नहीं है। शेरजंग गर्ग
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पाँव में रफ्तार नहीं है!
मत पूछिए क्यों पाँव में रफ्तार नहीं है।यह कारवाँ मज़िल का तलबग़ार नहीं है॥ शेरजंग गर्ग
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वर्ना रो पड़ोगे!
एक बार फिर से आज मैं, मेरे लिए गुरुतुल्य रहे वरिष्ठ हिंदी गीत कवि स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह नवगीत– बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के…
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दोस्तों की दाद तो!
दोस्तों की दाद तो मिलती ही रहती है सदाआज दुश्मन ने कहा–शाबाश तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र
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चाँदनी का हास!
आ गया हूँ बाद मुद्दत के शहर से गाँव में,आज देखा चाँदनी का हास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र