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उम्र जो बे-ख़ुदी में!
उम्र जो बे-ख़ुदी में गुज़री है,बस वही आगही* में गुज़री है| *जानकारी गुलज़ार देहलवी
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दीवार की मरम्मत!
आज एक पुरानी पोस्ट दोहराने का दिन है। आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को पसंद नहीं करता,वह, उसके नीचे जमी…