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उसे पहली कमाई देते!
सिसकियाँ उस की न देखी गईं मुझ से ‘रा’ना’,रो पड़ा मैं भी उसे पहली कमाई देते| मुनव्वर राना
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बंदिशें रोने लगीं!
साथ रहने से भी खिल जाते हैं रिश्तों के कँवल,बंदिशें रोने लगीं मुझ को रिहाई देते| मुनव्वर राना
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उड़ जा प्यारी चिडिया।
आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बहुत शिकारी घूम रहे हैं,बचकर उड़ जा, प्यारी चिड़िया। बहुत अटपटा ये मौसम हैहर कोई खुद में ही गुम हैस्वार्थ सभी के ऊपर भारीहत्या तक की है तैयारी किस पर यहाँ भरोसा तुझकोसबके हाथ दुधारी, चिड़िया। झूठा रिश्ता लोग दिखातेझट से अनजाने बन जाते,जहाँ लाभ…
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घर में डरते थे!
कहीं बे-नूर न हो जाएँ वो बूढ़ी आँखें,घर में डरते थे ख़बर भी मिरे भाई देते| मुनव्वर राना
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दर्द-भरा गीत थे हम!
सूने पनघट का कोई दर्द-भरा गीत थे हम,शहर के शोर में क्या तुझ को सुनाई देते| मुनव्वर राना
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बच्चे को मिठाई देते!
कुछ खिलौने कभी आँगन में दिखाई देते,काश हम भी किसी बच्चे को मिठाई देते| मुनव्वर राना