Category: Uncategorized
-
एक और गीत!
आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- तुमने चाहा था देखोगेमेरी रचनाओं की दुनिया,रुको द्वार पर सजा रहा हूँपीड़ाओं की जगमग लड़ियां| भीतर की दुनिया इतनी रंगीन नहीं,वश में रखना तुमअपने कौतूहल को, पाषाणों के बीच पटकना पड़ता है मन के कोमल भावोंकी इस मखमल को, हतप्रभ मत होनाजब भीतर…
-
अफ़्वाह उड़ा देते हैं!
होश में हो के भी साक़ी का भरम रखने को,लड़खड़ाने की हम अफ़्वाह उड़ा देते हैं| अजय सहाब
-
सुब्ह होते ही जिन्हें!
रात आई तो तड़पते हैं चराग़ों के लिए,सुब्ह होते ही जिन्हें लोग बुझा देते हैं| अजय सहाब
-
जीना भी सिखा देते हैं!
हादसे जान तो लेते हैं मगर सच ये है,हादसे ही हमें जीना भी सिखा देते हैं| अजय सहाब
-
हम को सज़ा देते हैं!
जब भी मिलते हैं तो जीने की दुआ देते हैं,जाने किस बात की वो हम को सज़ा देते हैं| अजय सहाब
-
आज बचपन कहीं!
आज बचपन कहीं बस्तों में ही उलझा है ‘सहाब’,फिर वो तितली को पकड़ना वो उड़ाना आए| अजय सहाब
-
स्कूल से छुट्टी जो मिले!
आह सहसा कभी स्कूल से छुट्टी जो मिले,चीख़ कर बच्चों का वो शोर मचाना आए| अजय सहाब
-
काश उस्तादों को!
हम को क़ुदरत ही सिखा देती है कितनी बातें,काश उस्तादों को क़ुदरत सा पढ़ाना आए| अजय सहाब
-
रूठूँ तो मनाना आए!
काश दुनिया की भी फ़ितरत हो मिरी माँ जैसी,जब मैं बिन बात के रूठूँ तो मनाना आए| अजय सहाब
-
हाथों में ख़ज़ाना आए!
काश लौटें मिरे पापा भी खिलौने ले कर,काश फिर से मिरे हाथों में ख़ज़ाना आए| अजय सहाब