Category: Uncategorized
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मेरे सीने में क्यूँ!
देने वाले ये हस्सास नाज़ुक सा दिल,मेरे सीने में क्यूँ ख़ास कर रख दिया| उदय प्रताप सिंह
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शाहदरा-कुछ स्मृतियां!
फिर एक बार याद आया शाहदरा। दिल्ली का यह यमुना-पार, हम थे जब यहाँतब एक ही पुल था यमुना परअंग्रेजों के ज़माने का,अब उम्र है उसकी सौ वर्ष से अधिक, नीचे कार-बस, ऊपर रेल। हमारे समय में अकेला थायह पुल चींटियों की तरह रेंगती थीं बसें इसमें, बात है 1950 से 80 तक की। शाहदरा,…
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आँधी का डर रख दिया!
तुम ने ये क्या किया बत्तियों की जगह,इन चराग़ों में आँधी का डर रख दिया| उदय प्रताप सिंह
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लम्बा सफ़र रख दिया!
दे के कस्तूरी हिरनों की तक़दीर में,प्यास का एक लम्बा सफ़र रख दिया| उदय प्रताप सिंह
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कितने फूलों का सर!
हम ने माना कि महका के घर रख दिया,कितने फूलों का सर काट कर रख दिया| उदय प्रताप सिंह
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उदासी का मुसाफ़िर यारो!
क्यूँ न लौटे वो उदासी का मुसाफ़िर यारो,ज़ख़्म सीने के उसे रोज़ सदा देते हैं| अजय सहाब