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मन है भारी!
आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मन है भारी आज सुबह सेये दुश्वारी आज सुबह से। कितने जतन किए बचने केघोड़ों की लगाम कसने के, जितना रोके, उतना भागेमन के अश्व नहीं रुकने के, विचलन मन के हो जाते हैंयहाँ कभी भी किसी वजह से। भागे वहाँ, जिधर कुछ पाएनिर्मोही हम…
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टूटे हुए पतवार हैं !
टूटे हुए पतवार हैं कश्ती के तो हम क्या,हारी हुई बाहों को ही पतवार बना दे| साहिर लुधियानवी
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इंसाफ़ तिरे साथ है!
डरता है ज़माने की निगाहों से भला क्यों,इंसाफ़ तिरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले| साहिर लुधियानवी
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तिरे ख़यालों से दूर जा के!
न सोचने पर भी सोचती हूँ कि ज़िंदगानी में क्या रहेगा,तिरी तमन्ना को दफ़्न कर के तिरे ख़यालों से दूर जा के| साहिर लुधियानवी
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कभी मिलेंगे जो रास्ते में!
कभी मिलेंगे जो रास्ते में तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे,कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा तो चुप रहेंगे नज़र झुका के| साहिर लुधियानवी
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न दिल को मालूम है!
तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन,न दिल को मालूम है न हम को जिएँगे कैसे तुझे भुला के| साहिर लुधियानवी
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उमीद की बस्तियाँ!
बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के,मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी