Category: Uncategorized
-
सारी तहरीरें मिटीं!
बरसात में दीवार-ओ-दर की सारी तहरीरें मिटीं,धोया बहुत मिटता नहीं तक़दीर का लिक्खा हुआ| बशीर बद्र
-
दिल की हवेली का!
अनमोल मोती प्यार के दुनिया चुरा कर ले गई,दिल की हवेली का कोई दरवाज़ा था टूटा हुआ| बशीर बद्र
-
वक़्त तो हर हाल में!
प्रस्तुत है आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- वक्त तो हर हाल में होता सिकंदर है, पर हमारी प्यास भीगहरा समंदर है। हम चले थे साथ लेकरचमकते पत्थर मनाते उत्सव चले हम अगम राहों पर,दर्द का हमसे रहा रिश्ता निरंतर है। कौन सा अब गीतगाना चाहते हैं हम,चल दिए पर कहाँ जाना चाहते…
-
उसको पाने के लिए!
मंदिर गए मस्जिद गए पीरों फ़क़ीरों से मिले, इक उस को पाने के लिए क्या क्या किया क्या क्या हुआ| बशीर बद्र
-
आसमान धुनिये के छप्पर सा-मेरा नवगीत-वीडिओ
https://photos.app.goo.gl/UaoeoZewjNMnRmKq7 आज अपना एक नवगीत अपने स्वर में शेयर कर रहा हूँआशा है आपको पसंद आएगा।धन्यवाद
-
हर चीज़ है बाज़ार में!
हर चीज़ है बाज़ार में इस हाथ दे उस हाथ ले,इज़्ज़त गई शोहरत मिली रुस्वा हुए चर्चा हुआ| बशीर बद्र
-
शायद उसे भी ले गए!
शायद उसे भी ले गए अच्छे दिनों के क़ाफ़िले,इस बाग़ में इक फूल था तेरी तरह हँसता हुआ| बशीर बद्र
-
लफ़्ज़ ग़ुंचे की तरह!
अब इन दिनों मेरी ग़ज़ल ख़ुशबू की इक तस्वीर है,हर लफ़्ज़ ग़ुंचे की तरह खिल कर तिरा चेहरा हुआ| बशीर बद्र
-
आँखें मिरी भीगी हुई!
शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ,आँखें मिरी भीगी हुई चेहरा तिरा उतरा हुआ| बशीर बद्र
-
चाँद में कैसे हुई क़ैद!
चाँद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी,ये कहानी किसी मस्जिद की अज़ाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली