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यू ट्यूब पर मेरा गीत- एकलव्य हम
यू ट्यूब पर मेरा एक और गीत आज प्रस्तुत है, कृपया सुनकर अपनी सम्मति दें।आप यहाँ दिए गए लिंक पर मेरे चैनल को सब्स्क्राइब करेंगे तो और अच्छ लगेगा।धन्यवाद Link to my channel- youtube.com/@samaysakshi
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तुम्हारी याद के!
तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या,जुदा हुए हैं तो अहद-ए-वफ़ा निभाना क्या। अज़हर इक़बाल
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क्या कुछ न हुआ ग़म से!
क्या कुछ न हुआ ग़म से क्या कुछ न किया ग़म ने,और यूँ तो हुआ जो कुछ बे-कार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मेरा यू ट्यूब चैनल
मैं इन दिनों यू ट्यूब पर अपने चैनल में अपने गीतों-कविताओं का पाठ अपने स्वर में रिकॉर्ड करके डाल रहा हूँ।भविष्य में अन्य अपने प्रिय कवियों की रचनाएं और हाँ कुछ फिल्मी गीत भी, विशेष रूप से मेरे प्रिय गायक मुकेश जी के गाए हुए डालूंगा। सभी मित्रों से अनुरोध है कि मेरे यू ट्यूब…
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मख़मूर नज़र आया!
ज़र्रा हो कि क़तरा हो ख़ुम-ख़ाना-ए-हस्ती में,मख़मूर नज़र आया सरशार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी
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होता जाता दूर निवाला!
अपनी एक नई रचना आज शेयर कर रहा हूँ, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कम होती जाती हैं खुशियांहोता जाता दूर निवालादोष तराजू में भी है कुछकुछ है कुटिल तौलने वाला। सभी साज़-सामान यहाँ हैंगीता और क़ुरान यहाँ हैंपर जिसको मानव कह पाएंआखिर वो इंसान कहाँ है, पोथी में उपदेश भरे हैंझूठा उन्हें बोलने वाला।…
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हल्का सा वो पर्दा भी!
ग़श खा के गिरे मूसा अल्लाह-री मायूसी,हल्का सा वो पर्दा भी दीवार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी
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क्या आख़री लम्हों में!
तू ने भी तो देखी थी वो जाती हुई दुनिया,क्या आख़री लम्हों में बीमार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी
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हो सब्र कि बेताबी!
हो सब्र कि बेताबी उम्मीद कि मायूसी,नैरंग-ए-मोहब्बत भी बे-कार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मेरी दो और रचनाएं- ‘पिता के नाम’ और ‘सन्नाटा शहर में’
यू ट्यूब पर मेरा नया वीडिओ, जिस पर दो कविताओं का पाठ शामिल है।यदि आप मेरे यू ट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब करेंगे तो आप मेरी कविताओं को भी सुन पाएंगे और मेरे गाए हुए मुकेश जी के और अन्य गायकों के गीत भी सुन पाएंगे आपसे विनम्र अनुरोध है कि मेरे चैनल को सब्स्क्राइब करके…