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मेरा एक और गीत- मौसम का वायलिन
आज मैं अपना एक और नवगीत, शेयर कर रहा हूँ- हमने कब मौसम का वायलिन बजाया है। मुझे आपकी सम्मति की प्रतीक्षा रहेगी- आप मेरे यू ट्यूब चैनल को भी सब्स्क्राइब करेंगे तो अच्छा लगेगा, लिंक यहाँ दिया गया है- https://www.youtube.com/@kris230450 आज के लिए इतना ही नमस्कार
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क़िस्मत जागे तो हम!
क़िस्मत जागे तो हम सोएँ क़िस्मत सोए तो हम जागें,दोनों ही को नींद आए जिस में कब ऐसी रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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इस बदली हुई रुत में !
आँखों में कहाँ रस की बूँदें कुछ है तो लहू की लाली है,इस बदली हुई रुत में अब तो ख़ूनीं बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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हम मन की डोरी खोलेंगे!
आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हम मन की डोरी खोलेंगे। गांठ बहुत मन की डोरी मेंफिर भी यह सुलझी दिखती हैबनी तरल जैसे जल धारासंवेदन आखर लिखती है, इसकी भाषा, अपनी भाषा, इसकी बानी हम बोलेंगे। यह भावों के नीर नहाई सभी तीर्थ यूं ही कर आई, कभी…
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गूँगों से भी बातें!
तय करना हैं झगड़े जीने के जिस तरह बने कहते सुनते,बहरों से भी पाला पड़ता है गूँगों से भी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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उम्मीद का सूरज डूबा!
उम्मीद का सूरज डूबा है आँखों में अंधेरा छाया है, दुनिया-ए-फ़िराक़ में दिन कैसा रातें ही रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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सूखी बरसातें होती हैं!
घिर घिर के बादल आते हैं और बे-बरसे खुल जाते हैं,उम्मीदों की झूटी दुनिया में सूखी बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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रजनी गुज़र रही है
आज मैं शेयर कर रहा हूँ यू ट्यूब पर मेरा एक और गीत, जो सर्दी की रात के अनुभव पर आधारित है-https://youtu.be/ob4L4MOTCNU?si=yv1bbTMDbur0affz आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा।
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दिल से बातें होती हैं!
जब वो नहीं होते पहलू में और लम्बी रातें होती हैं,याद आ के सताती रहती है और दिल से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी